Panchayati Raj | पंचायती राज | In Hindi.


Panchayati Raj पंचायती राज
Panchayati Raj | पंचायती राज | In Hindi.

Panchayati Raj | पंचायती राज | In Hindi.

Ø  रिपन ने स्थानीय शासन कर स्थापना का प्रयास किया था ।
Ø  संविधान के अनु 0- 40 में राज्यों कों पंचायतों के गठन का निर्देश दिया गया है ।
Ø  1993 में संविधान के 73वॉ संशोधन करके पंचायती राज्य संस्थान को संवैधानिक मान्यता दी गई है और 11वी अनुसूची में जोडा गया है ।
Ø  73वें संविधान संशोधन अधिनियम के बाद पंचायती राज्य अधिनियम का निर्माण करने वाला प्रथम राज्य कर्नाटक है ।

24 अप्रेल, 1993 से लागू पंचायती राज्य (73वॉ संविधान संशोधन ) अधिनियम

लगभग चार वर्ष बाद संसद ने शहरी और ग्रामीण स्तर पर सत्ता में जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायतों एंव शहरी संस्थाओं से संबंधित दो ऐतिहासिक विधेयक सर्वसम्मति से  पारित कर दिया ।  इस संबंध में दो संशोधन करने को भी लोकसभा ने मंजुरी दे दी ।
          इस अधिनियम के पारित हो जाने से संविधान में अब पंचायतों और शहरों की स्थानीय संस्थानों को भी स्थान मिल जाएगा । इस प्रकार संसद और राज्य विधान सभा के स्थानीय निकाय एंव पंचायतें भी संवैधानिक मान्यता प्राप्त कर लेंगी और निचले स्तर पर भी लोकतंत्र को मान्यता मिल जाएगी ।
           पंचायती राज्य संबंधी संविधान के 72वें संशोधन और नगर निकायों संबंधी 73वें संशोधन को संसद ने बिना किसी बहस के सर्वसम्मति से पारित कर दिया था । यह सर्वसम्मति संसद की संयुक्त समिति के अनुमोदन के बाद बन सकी । समिति में की गई सिफारिशों के अनुरुप विधेयक में संशोधन सरकार ने भी स्वीकार कर लिए ।
      श्री राजीव गांधी और बाद में श्री वी.पी. सिंह की सरकारों ने इन विधेयकों को अलग – अलग रुपों में पेश किया था , लेकिन कुछ मतभेदों के कारण उन्हें पारित नहीं कराया जा सका था । पिछले वर्ष ये विधेयक संसद की संयुक्त समिति को सौपे गये थे ।
      इस अधिनियमों में यह व्यवस्था की गई है कि शहरी निकायों व पंचायतों के चुनाव निश्चित समय पर कराए जाऐंगे । उनमें महिलाओं , पिछडे वर्गो और अनुसूचित जाति व जनजातियों को आरक्षण प्रदान किया जाएगा तथा उन्हें स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने व नियोजन के अधिकार भी दिए गए है ।
     अधिनियमों में पंचायतों को अवक्रमित किए जाने के छ: महीने के भीतर उनका चुनाव अनिवार्य रुप से कराने की व्यवस्था की गई है । इसमें जिला स्तर की समितियों का चुनाव किस ढंग से होगा यह राज्य विधानमंडलों पर छोड दिया गया है ।
      सरकारने प्रखंड तथा जिला स्तर की समितियों में संसद सदस्यों , विधेयकों तथा विधान परिषद् के सदस्यों को शामिल करने और वोट का अधिकार देने के संसदीय समिति के सुझाव को मान लिया ।
       इसी प्रकार सरकार ने गॉव स्तर पर पंचायतों के अध्यक्षों का चुनाव सीधे कराने कि सिफारिशको भी मान लिया है । विधेयक में अनुसुचित जाति तथा अनुसुचित जनजाती क्को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की व्यवस्था है । महिलाओं को हर स्तर पर एक - तिहाई स्थान देने की व्यवस्था की गई है
    सरकार ने पंचायत समितियों के सदस्यों की आयु घटाकर 21 वर्ष करने का सुझाव भी मान लिया है ।
     पंचायती राज्य अधिनियन में पंचायती को वित्तीय संसाधनों के हस्तांतरण की एक अनवार्य व्यवस्थालागू करने तथा इसके लिए उचित कसौटियों सुझाने के लिए हर वर्ष एक वित्त आयोग गठित करने का भी प्रावधान है ।
      इसमें पंचायतों के चुनाव पूरी तरह राज्य निर्वाचन आयोग के नियंत्रण में करने का प्रस्ताव भी शामिल है ।
      सरकार इस अधिनियम के प्रावधानों को केंद्र शासित क्षेत्रों में भी वहॉ की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार संशोधन के साथ लागू करेगी । मेघालय, नागालैण्ड और मिजोरम तथा कुछ पर्वतीय क्षेत्रों के जनजातीयों इलाकों तथा अनुसूचित क्षेत्रों को इस विधेयकों विशेषरुप से अनुच्छेद 243  के तहत इस विधेयक की परिधि से बाहर रखा गया है ।

Ø  बलबंत राय मेहता अमिति :- (क) ग्राम पंचायत, (ख) पंचायती समिति (मुख्य पहलु) (ग) जिला पंचायत

Ø  सर्वप्रथम 2 अक्टूबर 1959 में जवाहर लाल नेहरु ने राजसथान के नागौर में इसका उद्घाटन किया था।
Ø  आशोक मेहता समिति :-             (क) जिला (ख) पंचायत मंडल ।

Ø  डॉ० पी० वी० के० राव समिति :-(4) डॉ० एम० एल० सिंघवी समिति :-
पंचायत व्यवस्था के संबंध में प्रावधान – संविधान के भाग 9 में 16 अनुच्छेदों में किया गया है। नगरीय प्रशासन:- 47वॉ संविधान – 12वीं अनुसूची ।
Ø  आधुनिक काल में सबसे पहले 1687 में पूर्व प्रेसीडेन्सी शहर मद्रास में नगर निगम की स्थापना की गई ।
Ø  इसके बाद 1726 में बम्बईऔर कोलकता नगर निगम की स्थापना हुई ।
अनुसूचियॉं

Ø  पहली अनुसूची (अनुच्छेद 1 तथा 4) राज्य तथा संघ राज्य क्षेत्र का वर्णन ।
Ø  दूसरी अनुसूची (अनुच्छेद -59(3) , 65(3) , मुख्य पदाधिकारियों के वेतन – भत्ते
  75(6) , 97,125, 148(3), 158(3)      भाग – क राष्ट्रपति औ राज्यपालके वेतन - भत्ते
    164(5), 186 तथा 221           भाग-ग-लोक सभा तथा विधान-सभा के अध्यक्ष तथा
                                   उपाध्यक्ष, राज्यसभा तथा विधान-परिषद के सभापति तथा  उपसभापति के वेतन – भत्ते – घ – उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन – भत्ते , भाग – ड – भरत के नियंत्रक – महालेखा परीक्षक के वेतन – भत्ते ।
Ø  तीसरी अनुसूची (अनुच्छेद 75(4), 99, व्यवस्थापालिका के सदस्य, मंत्री , राष्ट्रपति , 124(6),
148(2),164(3), 188 और 219 उपरष्ट्रपति न्यायाधीशों आदि के    
 लिए शपथ लिए जाने वाले प्रतिज्ञा के प्रारुप दिए है ।
Ø  चौथी अनुसूची (अनुच्छेद 4(1),80(2), राज्य सभा में स्थानों का आवंटन राज्यों तथा संघ राज्य
क्षेत्रों से ।
Ø  पॉचवी अनुसूची (अनुच्छेद 244(1) अनुसूची क्षेत्रों और अनुसूची जनजातियों के प्रशासन और नियंत्रण
                             से संबंधित उपबन्ध ।
Ø  छठी अनुसूची (अनुच्छेद 244(2), 275(1)  असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के
जनजातियों क्षेत्रों प्रशासन के विषय में उपबन्ध ।
Ø  सातवी अनुसूची (अनुच्छेद 246   विषयों के वितरण से संबंधित सूची – 1 संघ सूची, सूची – 2 राज्य
                            सूची, सूची – 3 समर्वती सूची ।
Ø  आठवीं अनुसूची (अनुच्छेद 344(1), 351 भाषाएं - 22 भाषाओंका उल्लेख ।
Ø  नवी अनुसूची (अनुच्छेद 31(ख)   कुछ भूमि सुधार संबंधी अधिनियमों का विधि मान्यकरण ।
Ø  दसवीं अनुसूची (अनुच्छेद 10(2), 191(2) दल परिवर्तन संबंधी उपबंध तथा दल परिवर्तन के आधार
                            पर आयोग्यताएं ।
Ø  ग्यारहवीं अनुसूची              पंचायत राज्य अधिनियम ।
Ø  बारहवीं अनुसूची               नगरपालिका अधिनियम ।

 

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